भगवान कहाँ है?
हर सजीव प्राणी में परमात्मा का वास
सजीवों में भगवान का दर्शन
मानव धर्म के संस्थापक महानत्यागी बाबा जुमदेवजी ने सदा सिखाया कि भगवान किसी एक स्थान, न तो नागपुर मंडल में हैं, न मोहाडी मंडल में और न ही मौदा में। भगवान तो हर सजीव प्राणी में वास करते हैं – पशु, पक्षी, नर और नारी – सभी में वही परमात्मा प्रकट स्वरूप में विद्यमान हैं।
नर और नारी – सृष्टि की दो जातियाँ.
इस सृष्टि में केवल दो ही जातियाँ हैं – नर और नारी।
और इन्हीं नर-नारी में बाबाने भगवान का साक्षात्कार किया। नर और नारी दोनों ही इस मानव धर्म के दो आधारस्तंभ हैं।
नारी – रत्नों की खान
दुःख की बात है कि कुछ लोग सेवकों को भटकाने का काम करते हैं।
वे नारी का अपमान करते हैं, उनके प्रति गाली-गलौच करते हैं।
परंतु यह जान लो – नारी निंदा सबसे बड़ा अधर्म है।
नारी तो रत्नों की खान है, जिसकी पवित्र कोख से हमारे सदगुरु बाबा जुमदेवजी जैसे महान अवतार ने जन्म लिया।
जो व्यक्ति नारी का सम्मान नहीं कर सकता, वह इस पवित्र मानव धर्म के मार्ग को कैसे समझेगा?
सेवक का असली कर्तव्य
एक सच्चा सेवक वह है जो –हर प्राणी में भगवान को देखे।नारी का सम्मान करे।अपने अंतरात्मा में झाँककर अपने कर्म सुधारें।
जो केवल दूसरों के जीवन में झाँकता है और निंदा करता है, वह सेवक नहीं बल्कि सेवक नाम पर कलंक है।
संदेश सेवकों के लिए
सेवको! याद रखो –
नारी निंदा मत करो यार, नारी तो रत्नों की खान है।
जिसकी कोख से जन्मे, वही हमारे सदगुरु बाबा जुमदेवजी महान हैं।
निष्कर्ष
हर सजीव में भगवान को देखो,
नारी का सम्मान करो,
और अपने पवित्र कर्मों से मानव धर्म की सच्ची पहचान बनो।
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