भूतबाधाओं का विनाश - बहुउद्देशीय परमपूज्य परमात्मा एक सेवक मंडळ मोहाडी

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बुधवार, २६ मे, २०२१

भूतबाधाओं का विनाश

भूतबाधाओं का विनाश

बाबाने परमेश्वर की कृपा प्राप्त करने के बाद वे उनके पास आनेवाले दुखी त्रस्त लोगों का दुख दूर कर उनको उससे मुक्त करते थे। वर्तमान में भूत बाधाओं के संबंध में जो अंधश्रध्दा लोगों में फैली है। वही अंधश्रध्दा उस समय भी परंपरा के अनुसार लोगो के दिलों में घर कर गयी थी । लोगों का भूतबाधाओं से मुक्ती पाने हेतु दैवी शक्ती के पास जाकर उस त्रासदी से स्वयं को बचाने का  प्रयास करते है इस प्रकार बाबाके घर में भूतबाधाओं पर विश्वास करनेवाले लोग थे और उन्हें भी इस परमेश्वरी कृपा का लाभ होकर उनकी भूत बाधाएँ खत्म हुई और वे अंधश्रध्दा से आझाद हुए।

        बाबांके घर के सामने उनके दो जेष्ठ बंधु श्री बालकृष्ण और नारायणराव अलग रहते थे । उनके घर बालकृष्ण की पत्नी श्रीमती सीताबाई के तन में भूत आता था घर में सभी को इससे सारी रात परेशानी होती थी बाबा के घर हवनकार्य होने के कारण उन्हे सुख शांति का लाभ हुआ था । बाबाने परमेश्वरी कृपा प्राप्त की थी इसलिए वे दोनो भाई बाबा के पास त्रिताल हवन की समाप्ती के दुसरे ही दिन पधारे और उन्होने बाबा को बिनती की कि बाबा आप हमारे घर हवन करे। इससे हमारे दुःख दूर होंगे बाबाने उनकी बिनती को मानकर बताया की, मैं हरदिन श्याम को एक ही समय ग्यारह दिन हवन करूंगा।

        निर्धारानुसार बाबांने हवन कार्य की शुरूवात की श्रीमती सीताबाई यहाँ पास ही बैठती थी । हवन के पहलेही दिन हवन कार्य के दौरान उस बाई के शरीर में बहुत सारे भूत आने लगे । आहुती डालने के दौरान उस बाई के मुख से ऐसे शब्द निकलते थे कि मैं फलाना हुँ। मेरा नाम फलाना है । मैं फलानी जगह रहती हूँ मुझे बाबा हनुमानजीने पकडा और हवनमें डाला । ऐसे शब्द निरंतर हवन समाप्त होने तक हर रोज उस बाई के मुख से निकलते थे । तिसरे हवन के दिन उपरोक्त शब्द करीब-करीब दो घंटो तक उस बाई के मुख से निकलते रहे, तत्पश्चात दुसरे शब्द उसके मुख से बाहर निकले मेरे शरीर में बहुत जलन हो रही है, मैं जल रही है। और अब मर रही हूँ ऐसे वह जोर-जोर से चिल्लाती थी। उसके यह शब्द सुनकर और उसकी यह दुर्दषा देखकर बाबा को बहुत बुरा लगा । उनसे रहा नही गया उन्होने कपूर जलाकर बाबा हनुमानजी को बिनती की कि बाबा हनुमानजी मेरे सामने यह बहुत बड़ी समस्या खडी हुई है । तब आप उसे समाधान दे बिनती पूर्ण होने पर तथा कपूर बुझने के बाद परमेश्वरने बाबां की बिनती को प्रतिसाद दिया। उस बाई के मुख से पुनः शब्द निकले कि मैं पार्वती हुँ बाबा हनुमानजी मुझे कैलास बुलाने आये और कहने लगे की उस औरत के शरीर की अंगार हो रही है। तुम वहाँ जाओं और उसे संभालो । पार्वतीजीने आगे कहा कि मेरी अंगार हो रही है। मुझे इक्कीस गुंड पानी से नहलाओं और सफेद वस्त्र पहनाओं। बाबाकों यह शब्द सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ । उन्हे लगा उसके बोलने में ऐसा परिवर्तन कैसा हुआ। तब बाबाने सलेटपट्टी पर लिखकर उस परिवार जनों को उस औरत से पुछने के लिए कहा कि अब तक शैतान आये अब पार्वती कैसी आयी। उसके अनुसार उस भाई ने पुछा तब उसने उत्तर दिया कि हनुमानजी मुझे कैलास बुलाने आये और मुझसे कहा, उस झाड (बाई) के शरीर में प्रवेष करो और उसे बचाओं यह सुनकर बाबानें सलेटपट्टी पर लिखकर आदेश दिया कि उसे इक्कीस गुंड पानी से नहलाकर सफेद वस्त्र पहनाओं और बाद में हवन कार्य में लाओं। तद्नुसार उस बाई को इक्कीस धगरी पानी से नहलाकर सफेद वस्त्र पहनाए और वह बाई फिर से हवन कार्य में आ बैठी तब तक हवन करना रोका गया था। तत्पश्चात हवन कार्य पुरा किया । उस दिन से उस बाई के शरीर में बिल्कुल बंद हुआ और तब से उसके शरीर में प्रत्येक शनिवार को पार्वती आने लगी।

        इस ग्यारह दिन के हवन कार्य के दौरान एक दिन जिस व्यक्ति ने बाबा को मंत्र दिया था वह व्यक्ति हवन करते समय बाबा के पास आया और हवन के लिए बैठा हवन समाप्त होने पर वह व्यक्ति बाबाकों बताने लगा कि मैं जिस जगह पर बैठा था वह जगह हवन कार्य के समय जोर जोर से हिल रही थी संपूर्ण आहुति देना बंद होने पर जगह हिलना बंद हुआ। इस पर बाबाने ऐसा अनुमान लगाया कि इस घर से संपूर्ण भूतबाधा नष्ट होकर वह पवित्र हुआ है। अब यहाँ परमेश्वर वास्तव करेगा । इस प्रकार उस परिवार के सभी को सुखशांती मिली।

        बाबा के कारण भूतबाधाएँ नष्ट होती है। यह जब लोगों को मालूम होने लगा। तब बहुत से लोग बाबा के यहाँ आने लगे । बाबा उन्हे मंत्र से तीर्थ बनाकर देते थे । तथा उनके दुःखों पर मंत्र के व्दारा फुक मारकर उनके दुःख दूर करते थे। प्रत्येक शनिचर को जब श्रीमती सीताबाई के शरीर मे पार्वती आती थी। तब उनकी ओर भूतबाधाओं से पिडित लोग आते थे । जिन लोगों के शरीर में देवी देवता, भूत, शैतान आते थे । वे उस पार्वती से बहुत वादविवाद करते रहते थे । तब अंत में पार्वती उनसे कहती कि, मैं तुझे जला दूंगी तब वे लोग शांत होते थे और उनके शरीर की देवी, देवता, भूत, शैतान नष्ट होकर वे होश में आते थे । तत्पश्चात उनके शरीर में कभी भी भूत नही आता ।

        इस प्रकार उनके यहाँ दुःखों से ग्रस्त लोगों को भी सुख मिलने लगा और परमेश्वरी कृपा का लाभ होने लगा और इस तरह बाबानें परमेश्वरी कृपा से भूतबाधाएँ नष्ट होती है, भूत - शैतान परमेश्वर से डरते है और जहाँ परमेश्वर निवास करता है वहाँ भूत-शैतान नही रह सकते यह सिध्द कर दिखाया है। भूत बाधा देव-देवता इनपर लोगों में व्याप्त अंधश्रध्दा को बाबाने तिलांजली दी। यद्यापि बाबा लोगों के दुःख दूर करते थे फिर तो भी उन्हें इस बाबत कुछ भी ज्ञात नही था । वे अज्ञातवास में थे।


|| 🙏🙏नमस्कार जी 🙏🙏||


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